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रेप-पॉक्सो मामलों में तुरंत मिलेगा इंसाफ! मोदी कैबिनेट ने 2031 तक बढ़ाई फास्ट ट्रैक कोर्ट योजना, अबतक निपटा चुकी है 4 लाख से ज्यादा केस

 Written By: Vinay Trivedi
 Published : Nov 05, 2026 10:25 am IST,  Updated : Nov 05, 2026 10:25 am IST

केंद्र सरकार ने अगले 5 साल के लिए फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट की योजना को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है। सरकार का मानना है कि इससे Judiciary की संस्थागत क्षमता और मजबूत होगी। इसकी वजह से पीड़ितों, खासतौर से महिलाओं-बच्चों को समय पर इंसाफ मिल पाएगा।

Fast Track Special Courts- India TV Hindi
मोदी कैबिनेट ने रेप और पॉक्सो एक्ट के मामलों की तुरंत सुनवाई के लिए FTSC योजना को 5 साल के लिए बढ़ाया। Image Source : ANI (फाइल फोटो)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में यूनियन कैबिनेट ने रेप और पॉक्सो एक्ट के मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट यानी FTSC की केंद्र प्रायोजित योजना को 5 साल के लिए जारी रखने की मंजूरी दे दी है। यह स्कीम 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक लागू रहेगी। इसका कुल खर्च 3,788.04 करोड़ रुपये है, जिसमें केंद्र सरकार का हिस्सा 2,353.15 करोड़ रुपये और राज्य व केंद्र शासित प्रदेशों का भाग 1,434.89 करोड़ रुपये होगा। केंद्र सरकार के हिस्से को निर्भया फंड से फंड किया जाएगा।

बढ़ाकर 850 की जाएगी फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट की संख्या

इस स्कीम के तहत तमाम भागीदार राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में स्पेशल पॉक्सो कोर्ट समेत 850 फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट के संचालन का प्रावधान है। अभी 779 एफटीएससी काम कर रहे हैं, जिनमें 399 स्पेशल पॉक्सो कोर्ट शामिल हैं। अब इनकी संख्या बढ़ाकर 850 की जाएगी ताकि अतिरिक्त जिलों में कवरेज बढ़ाई जा सके। यह विस्तार भारत के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पेंडिंग मामलों के आंकड़ों के आधार पर होगा। इस योजना के अंतर्गत पॉक्सो एक्ट, 2012 के तहत रेप और क्राइम से जुड़े पेंडिंग मामलों के जल्द निपटान के लिए समर्पित न्यायिक अधिकारी, स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर और 6 सपोर्ट स्टाफ का प्रावधान है। हर FTSC को खासतौर से सौंपे गए एक Special Public Prosecutor का प्रपोजल है। इससे त्वरित सुनवाई सुनिश्चित होगी।

रेप-पॉक्सो एक्ट के पेंडिंग मामलों की संख्या में कमी लाना है मकसद

कैबिनेट के निर्णय से यौन अपराधों के पीड़ितों के लिए त्वरित सुनवाई और टाइम-बाउंड इंसाफ करना सुनिश्चित होगा। रेप और पॉक्सो एक्ट के लंबित मामलों की संख्या में कमी आएगी। यह स्कीम कमजोर गवाह बयान केंद्रों और बच्चों के अनुकूल कोर्ट स्थानों की स्थापना को प्रोत्साहित करती है, ताकि पीड़ितों की गवाही को आगे संकट पैदा किए बिना सुविधाजनक बनाया जा सके।

इस योजना के पहले लाभार्थी हैं महिलाएं और बच्चे

इस स्कीम को Justice Department की तरफ से संबंधित राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन के समन्वय से लागू किया जाएगा। जस्टिस डिपार्टमेंट FTSC डैशबोर्ड, Periodic Progress Report और राज्य की Expense Details के जरिए प्रदर्शन की निगरानी करेगा। जस्टिस डिपार्टमेंट हाईकोर्ट और राज्य सरकारों के साथ भी परामर्श करेगा। इस योजना के प्राथमिक लाभार्थी महिलाएं और बच्चे हैं, जो पॉक्सो एक्ट के अंतर्गत रेप और क्राइम की शिकार हैं।

2019 में हुई थी FTSC की इस योजना की शुरुआत

बता दें कि फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट की योजना की शुरुआत 2 अक्टूबर 2019 को हुई थी। यह फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट के लिए केंद्र प्रायोजित योजना आपराधिक कानून (संशोधन) अधिनियम, 2018 के बाद और सुप्रीम कोर्ट के 25 जुलाई 2019 के निर्देशों के अनुपालन में शुरू की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने पॉक्सो एक्ट के तहत 100 से ज्यादा लंबित मामलों वाले जिलों में डेडिकेटेड स्पेशल कोर्ट की स्थापना का निर्देश दिया था। स्कीम की शुरुआत से अब तक कुल 4,02,457 मामले निपटाए जा चुके हैं। यह स्कीम शुरू में 1 साल के लिए शुरू की गई थी और बाद में इसे 31 मार्च 2026 तक बढ़ा दिया गया था। इससे पहले, जुलाई में पेपर लीक मामले पर केंद्र सरकार ने एक्शन लेते हुए देश के 4 शहरों में फास्ट ट्रैक कोर्ट बनवाने का ऐलान किया था।

(इनपुट- IANS)

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